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Shri Hanuman Mandir par aaj: Three New Stories published today;

मारुतिनंदन का महासंग्राम: अजर-अमर शक्ति का रहस्य

 

अध्याय 1: पवन का वेग और प्रलयंकारी भूख

त्रेता युग का भोर था। अंजना के गर्भ से एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ, जो साक्षात पवन देव का अंश था। बालक की भूख ने समस्त देवताओं को भयभीत कर दिया। उसने उगते हुए सूर्य को एक फल समझकर निगलने की ठानी। सूर्य की ओर छलांग लगाते ही आकाश में अंधकार छा गया। बालक की शक्ति देख इंद्रदेव ने अपनी वज्र से प्रहार किया। जैसे ही वह वज्र उस नन्हें बालक की ठुड्डी (हनु) पर लगा, संसार कांप उठा। क्या बालक जीवित बच पाएगा, या देवताओं का यह कृत्य एक भीषण संकट को जन्म देगा?

अध्याय 2: श्राप का वरदान और विस्मृति

इंद्र के प्रहार से बालक मूर्छित हुआ तो पवन देव कुपित हो गए और संसार की वायु रोक दी। सृष्टि छटपटाने लगी। ब्रह्मा जी ने आकर बालक को पुनर्जीवित किया और उसे अमरत्व का वरदान दिया। किंतु ऋषियों के श्राप के कारण, हनुमान अपनी असीम शक्तियों को भूल गए। वे अपनी शक्तियों से अनभिज्ञ, केवल राम सेवा के लिए समय की प्रतीक्षा करने लगे। क्या उन्हें कभी ज्ञात होगा कि वे साक्षात शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं?

अध्याय 3: किष्किंधा की भेंट

ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव के सचिव के रूप में हनुमान जी ने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को देखा। उनके प्रथम दर्शन में ही हनुमान जी ने पहचान लिया कि ये ही नारायण हैं। उन्होंने एक ब्राह्मण का वेश धारण किया और राम के चरणों में गिर पड़े। यह मिलन कोई साधारण भेंट नहीं थी, बल्कि युगों के बंधन का प्रारंभ था। परंतु, क्या राम और हनुमान का यह मिलन लंका के विनाश की नींव बनेगा?

अध्याय 4: समुद्र उल्लंघन का महासाहस

मैनाक पर्वत और सुरसा को परास्त कर हनुमान जी विशाल समुद्र के ऊपर से उड़ रहे थे। लंका नगरी सामने थी, परंतु बीच में थी राक्षसी सिंहिका। उसने हनुमान जी की परछाईं को पकड़ लिया। हनुमान जी ने पल भर में अपना आकार पर्वताकार कर लिया। जैसे ही उन्होंने लंका में प्रवेश किया, त्रिकूट पर्वत पर स्थित स्वर्ण द्वार पर उन्हें रुकना पड़ा। क्या लंकिनी का प्रहार हनुमान जी के इस पावन कार्य को विफल कर देगा?

अध्याय 5: अशोक वाटिका और सीता का विलाप

हनुमान जी ने देखा कि माता सीता दुखी हैं। रावण के क्रूर सैनिक उन्हें धमका रहे थे। हनुमान जी ने छिपकर सब देखा। जब रावण ने आकर माता को भय दिखाया, तब हनुमान जी ने उचित अवसर पर अपनी पहचान दी। उन्होंने मुद्रिका माता को सौंपी। लेकिन, तभी लंका के सैनिकों की भारी टुकड़ी ने उन्हें घेर लिया। क्या वे माता को बचा पाएंगे या रावण के बंदी बन जाएंगे?

अध्याय 6: लंका दहन का ज्वालामुख

रावण के सैनिकों ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी। यह उनकी सबसे बड़ी भूल थी। हनुमान जी ने उसी जलती पूंछ से पूरी स्वर्ण लंका को राख के ढेर में बदल दिया। रावण का अहंकार चूर-चूर हो गया, परंतु यह तो केवल एक ट्रेलर था। लंका का महायुद्ध अभी शेष था। अगली सुबह क्या होगा? क्या हनुमान जी के क्रोध से रावण का कुल पूरी तरह मिट जाएगा?

अध्याय 7: राम का आलिंगन और चिरंजीवी सत्य

युद्ध के उपरांत, जब राम ने हनुमान जी को गले लगाया, तो वह आलिंगन ब्रह्मांड की सबसे पवित्र घटना थी। हनुमान जी ने राम से कोई पद नहीं माँगा, बस सदा के लिए उनकी भक्ति माँगी। आज भी, जहाँ राम कथा होती है, वहाँ हनुमान जी अदृश्य रूप में विराजमान होते हैं। वे आज भी जीवित हैं, हिमालय की कंदराओं में ध्यानमग्न। क्या आप जानते हैं कि वे किस गुप्त स्थान पर आज भी प्रभु के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं?

इतिहास के पन्नों में दबी हैं कुछ ऐसी सच्चाईयां, जिन्हें जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। क्या आप तैयार हैं उस रहस्य को जानने के लिए, जो आज भी समय की परतों के नीचे सुरक्षित है? - 

पाताल में धधकता सूर्य