मथुरा का वह अंधकारमय रहस्य: जब स्वयं भगवान ने लिया अवतार
अध्याय 1: एक विवाह और मृत्यु की भविष्यवाणी
मथुरा नरेश उग्रसेन के पुत्र, क्रूर कंस ने अपनी अत्यंत प्रिय बहन देवकी का विवाह यदुवंशी वसुदेव से कराया। विदाई के समय कंस स्वयं प्रेमवश उनका रथ हांक रहा था। परंतु तभी आकाश में बादलों की भयंकर गर्जना हुई और एक स्पष्ट आकाशवाणी गूंज उठी— "अरे मूर्ख कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी का आठवां पुत्र तेरा काल बनेगा।" यह सुनते ही कंस का सारा प्रेम क्षण भर में क्रोध में बदल गया। उसने म्यान से अपनी चमकदार
अध्याय 2: कारागार का सन्नाटा और खून के आंसू
वसुदेव ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर कंस को वचन दिया कि वे अपनी हर संतान उसे सौंप देंगे। कंस ने दोनों को मथुरा के उस अभेद्य
अध्याय 3: मध्यरात्रि का वह अलौकिक चमत्कार
अष्टमी की वह काली और भयानक रात थी। मूसलाधार वर्षा हो रही थी। ठीक मध्यरात्रि में कारागार अचानक एक दिव्य प्रकाश से जगमगा उठा। वहां एक साधारण शिशु नहीं, बल्कि चतुर्भुज रूप में स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए, जिनकी कांति से कोठरी एक स्वर्णिम
अध्याय 4: यमुना का उफान और शेषनाग की छाया
शिशु को सिर पर उठाए वसुदेव तूफानी रात में यमुना तट पर पहुंचे। नदी उफान पर थी और लहरें भयंकर रूप ले रही थीं। जैसे ही वसुदेव ने जल में प्रवेश किया, जलस्तर बढ़ने लगा। परंतु तभी अनंत शेषनाग जल से प्रकट हुए और उन्होंने अपने फनों का छत्र बनाकर शिशु को वर्षा से बचा लिया। यमुना की लहरें ऊपर उठीं, केवल भगवान के चरण स्पर्श किए और फिर रास्ता देते हुए शांत हो गईं। वसुदेव ने सुरक्षित नदी पार कर ली और वे गोकुल के मुखिया नंदराज के घर पहुंच गए। गोकुल में रात का सन्नाटा पसरा था... लेकिन क्या बिना किसी के जागे देवकी के पुत्र को यशोदा की पुत्री से बदलना संभव हो पाएगा?
अध्याय 5: नंद भवन का रहस्यमयी परिवर्तन
नंद भवन में चारों ओर शांति थी। कक्ष में
अध्याय 6: योगमाया की गर्जना और कंस का भय
सूचना पाते ही कंस पागलों की तरह भागता हुआ कारागार पहुंचा। देवकी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि यह तो एक कन्या है, परंतु कंस ने किसी की न सुनी। उसने कन्या के पैर पकड़े और उसे चट्टान पर पटकना चाहा। लेकिन वह साधारण कन्या नहीं थी! वह कंस के हाथों से छूटकर आकाश में उड़ गई और अष्टभुजा देवी योगमाया के रूप में प्रकट हुई। "तुझे मारने वाला तो गोकुल में जन्म ले चुका है!" यह कहकर देवी अंतर्ध्यान हो गईं। भय से कांपते कंस के रक्षकों ने अपनी
अध्याय 7: गोकुल में आनंद और नवयुग का आरंभ
इधर गोकुल में सुबह होते ही जब यशोदा ने अपने नीले वर्ण वाले अत्यंत सुंदर पुत्र को देखा, तो पूरे नंदगांव में आनंद की लहर दौड़ गई। हर घर के द्वार पर मंगल